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यक्षगन्धर्वभोगिषु
यक्षान्सुविपुलेक्षणान्
यच्च
यच्च
यच्चान्यदपि
यच्चेतरैर्महाय़ज्ञैर्वेद
यच्छ्रेय़ः
यजन्तो
यजेत
यज्ञं
यज्ञक्षोभकरः
यज्ञविघ्नाच्च
यज्ञस्तितिक्षा
यज्ञाञ्श्रूय़तामिदम्
यज्ञिय़म्
यज्ञेषु
यज्ञो
यतः
यतन्तोऽप्यकृतात्मानो
यतव्रतम्
यतिताः
यतो
यत्
यत्कार्यं
यत्कृते
यत्तच्छृणु
यत्तदासीन्महद्युद्धं
यत्ता;
यत्ते
यत्तो
यत्त्वां
यत्नतः
यत्नेन
यत्पुंसां
यत्प्रोक्तं
यत्र
यत्र
यत्र
यत्र
यत्र
यत्र
यत्र
यत्रातिष्ठत्कृपो
यत्राय़जत
यत्समुदाहृतम्
यथर्तावृतुसम्प्रय़ुक्तः
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथा
यथाकामं
यथाक्रमम्
यथाग्नि;
यथातथम्
यथादृष्टं
यथान्याय़ं
यथापूर्वं
यथाभ्युपैति
यथार्हति
यथावत्पुनरन्वपृच्छ;
यथावद्विदुर
यथाविधि
यथावृत्तं
यथाशक्ति
यथासञ्ज्ञो
यथास्मृति
यथेच्छकम्
यथेष्टं
यथैव
यथैषां;
यथोचितं
यथोपपन्नं
यदनन्तरम्
यदर्थं
यदस्य
यदा
यदा
यदा
यदा
यदा
यदाश्रौषं
यदि
यदि
यदि
यदि
यदि
यदि
यदि
यदि
यदि
यदिष्टं
यदुक्तास्मि
यदूचतुः
यदेकं
यदैतान्यवतिष्ठन्ते
यद्द्रोणमाद्रवन्सङ्ख्ये
यद्भीमं
यद्यदात्मन
यद्ययं
यद्येतदमृतादस्ति
यद्वक्ष्यसि
यद्वान्यन्न
यद्वो
यन्ता
यन्न
यन्मां
यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि
यमक्षय़म्
यमराष्ट्रवर्धनान्
यमस्य
यमाहुर्वै
यमो
यमौ
यवनैः
यशः
यशसि
यशस्विनम्
यशस्विनी
यशो
यश्च
यश्चाधनः
यष्टव्यमेवमुक्तं
यस्तु
यस्तु
यस्त्वमित्रेण
यस्मात्तु
यस्मान्मम
यस्मिन्पारिप्लवे
यस्य
यस्य
यस्य
यस्य
यस्य
यस्याव्यक्तं
या
या
या
यां
याचन्तेऽभोज्यान्याहारय़न्ति
याज
याज्ञसेनी
यातं
याति
यातुधानाश्च
यात्रार्थं
यादवश्रेष्ठो
यादृशम्
यानवता
यानि
यान्कामान्मनसेच्छति
यान्ति
यान्ति
यान्स्म
यावच्च
यावत्स्यादह्ना
यावद्धि
याश्च
यास्यन्ति
याहि
युक्तं
युक्तं;
युक्तमशक्तं
युक्ता
युक्ताः
युक्तो
युक्त्वा
युगपद्व्यशीर्यन्त
युगान्ताग्निमिवोत्थितम्
युगे
युज्यते
युतम्
युद्धं
युद्धं
युद्धकुशला
युद्धद्यूतं
युद्धमासीदुपह्वरे
युद्धश्रद्धां
युद्धार्थी
युद्धे
युद्धे
युद्धे
युद्धे
युद्धेन
युधां
युधि
युधि
युधि
युधि
युधिष्ठिर
युधिष्ठिर
युधिष्ठिर
युधिष्ठिर
युधिष्ठिरं
युधिष्ठिरः
युधिष्ठिरः
युधिष्ठिरः
युधिष्ठिरः
युधिष्ठिरमथाव्रवीत्
युधिष्ठिरम्
युधिष्ठिरम्
युधिष्ठिरस्य
युधिष्ठिरे
युधिष्ठिरो
युध्यतां
युध्यन्वै
युध्यमानेषु
युध्येत
युवा
युवय़ोर्वर्धतां
युय़ुक्षतः
युय़ुत्सुश्च
युय़ुधानरथं
युय़ुधुः
यूपस्य
ये
ये
ये
ये
ये
ये
ये
ये
ये
ये
ये
ये
ये
येन
येन
येन
येन
येनाच्छिन्नं
येनैषामुद्धरे
येषां
येषामागः
येऽप्येकस्य
यैर्विनश्यन्ति
यो
यो
यो
यो
यो
यो
यो
यो
योक्त्राणि
योगक्षेमाय़
योगवित्
योगानां
योगी
योगो
योजिताः
योत्स्यते
योत्स्ये
योद्धुकामा
योधसहस्रेषु
योधाः
योधान्वरान्वरान्
योधोऽभवत्कश्चिन्मम
योधय़ेदपि
योनिषु
योऽग्रं
योऽभिगच्छति
योऽसौ
योऽय़ं
यौवनं
यय़ा
यय़ातेस्त्वेव
यय़ुश्च
यय़ौ
यय़ौ
यत्राय़जत
वन पर्व
अध्याय ११४
१७ ख
visibility
यत्राय़जद्राजसूय़ेन
शल्य पर्व
अध्याय ४२
३९ क
visibility
यत्रेच्छकनिवासाश्च
वन पर्व
अध्याय २६०
१३ ग
visibility
यत्रेच्छसि
सभा पर्व
अध्याय ५७
१२ ख
visibility
यत्रेच्छसि
वन पर्व
अध्याय २५
९ ख
visibility
यत्रेच्छसि
वन पर्व
अध्याय १८०
३१ ख
visibility
यत्रेच्छसि
वन पर्व
अध्याय १८०
३५ क
visibility
यत्रेच्छसे
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
१९२ ख
visibility
यत्रेच्छागामिनो
अनुशासन पर्व
अध्याय ७४
१२ क
visibility
यत्रेजिवानुडुपती
शल्य पर्व
अध्याय ५०
१ क
visibility
यत्रेदं
भीष्म पर्व
अध्याय १०
१ क
visibility
यत्रेदं
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
१२ क
visibility
यत्रेदानीं
वन पर्व
अध्याय १७७
३२ क
visibility
यत्रेदृशं
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
२२ ख
visibility
यत्रेन्द्रातिक्रमं
शान्ति पर्व
अध्याय ३४३
३ ख
visibility
यत्रेप्सितं
अनुशासन पर्व
अध्याय ९४
४३ ख
visibility
यत्रेमं
आदि पर्व
अध्याय ३०
९ क
visibility
यत्रेमा
विराट पर्व
अध्याय १
६ ख
visibility
यत्रेमाः
वन पर्व
अध्याय २५
३ ख
visibility
यत्रेष्टं
सभा पर्व
अध्याय ३
१४ क
visibility
यत्रेष्टं
अनुशासन पर्व
अध्याय ४४
४९ ख
visibility
यत्रेष्टं
अनुशासन पर्व
अध्याय ८१
११ ख
visibility
यत्रेष्टं
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
१२ ख
visibility
यत्रेष्टमृषिभिः
वन पर्व
अध्याय ८८
९ ख
visibility
यत्रेष्ट्वा
सभा पर्व
अध्याय ३
१० क
visibility
यत्रेष्ट्वा
सभा पर्व
अध्याय ३
१२ क
visibility
यत्रेष्ट्वा
वन पर्व
अध्याय १२९
३ ख
visibility
यत्रेष्ट्वा
वन पर्व
अध्याय १३०
१७ ख
visibility
यत्रेष्ट्वा
शल्य पर्व
अध्याय ४१
६ क
visibility
यत्रेष्ट्वा
शल्य पर्व
अध्याय ४८
१७ क
visibility
यत्रैच्छदग्रणीः
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
१० ख
visibility
यत्रैच्छदर्जुनः
द्रोण पर्व
अध्याय १८
४ ख
visibility
यत्रैतत्सुमहच्छत्रं
शल्य पर्व
अध्याय २३
४ क
visibility
यत्रैतन्न
वन पर्व
अध्याय १७७
२१ ख
visibility
यत्रैतल्लक्ष्यते
वन पर्व
अध्याय १७७
२१ क
visibility
यत्रैताः
अनुशासन पर्व
अध्याय ४६
५ ख
visibility
यत्रैति
अनुशासन पर्व
अध्याय १२३
१२ ख
visibility
यत्रैते
विराट पर्व
अध्याय ३६
१८ ख
visibility
यत्रैते
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
४३ क
visibility
यत्रैते
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
१६ ख
visibility
यत्रैते
द्रोण पर्व
अध्याय ९५
११ ख
visibility
यत्रैते
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
५० ख
visibility
यत्रैते
शल्य पर्व
अध्याय २३
४ ख
visibility
यत्रैत्य
आदि पर्व
अध्याय ६५
३२ क
visibility
यत्रैनमन्वय़ाद्भीमो
आदि पर्व
अध्याय २
१२४ क
visibility
यत्रैनमासीनं
विराट पर्व
अध्याय ४
११ क
visibility
यत्रैनामभ्यवर्तन्त
वन पर्व
अध्याय १३०
५ ख
visibility
यत्रैव
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
१५ क
visibility
यत्रैव
शान्ति पर्व
अध्याय १५४
३६ ख
visibility
यत्रैव
शान्ति पर्व
अध्याय २१९
११ क
visibility
यत्रैव
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
१७ क
visibility
यत्रैव
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
७ ख
visibility
यत्रैवं
शान्ति पर्व
अध्याय ४१
३ ख
visibility
यत्रैष
आदि पर्व
अध्याय ९६
३६ क
visibility
यत्रैष
द्रोण पर्व
अध्याय ९७
४६ ख
visibility
यत्रैष
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
२३ क
visibility
यत्रैष
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
१२ ख
visibility
यत्रैष
शल्य पर्व
अध्याय २३
५ क
visibility
यत्रैषा
विराट पर्व
अध्याय ५३
१ क
visibility
यत्रैषा
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
३३ क
visibility
यत्रोक्तं
आदि पर्व
अध्याय २
१५४ ख
visibility
यत्रोग्रं
वन पर्व
अध्याय १०९
१९ ख
visibility
यत्रोग्रं
द्रोण पर्व
अध्याय ८८
३६ ख
visibility
यत्रोडुराड्यक्ष्मणा
शल्य पर्व
अध्याय ३४
३६ ख
visibility
यत्रोत्तरां
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
१८ क
visibility
यत्रोत्तराः
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
२५ क
visibility
यत्रोत्पन्नः
वन पर्व
अध्याय १९४
११ ख
visibility
यत्रोत्पन्नः
अनुशासन पर्व
अध्याय १४३
८ क
visibility
यत्रोत्पन्नमृषिमाहुर्वसिष्ठम्
अनुशासन पर्व
अध्याय १४३
१८ क
visibility
यत्रोत्सृष्टः
शल्य पर्व
अध्याय ४३
१४ क
visibility
यत्रोद्धृताः
वन पर्व
अध्याय ८१
३६ ख
visibility
यत्रोपरमते
भीष्म पर्व
अध्याय २८
२० क
visibility
यत्रोपलप्स्यसे
उद्योग पर्व
अध्याय ९९
१६ ख
visibility
यत्रोपय़ाति
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
५४ ख
visibility
यत्रोवाच
आदि पर्व
अध्याय २
१३७ ख
visibility
यत्रोवाच
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
८ ख
visibility
यत्रोषितं
आदि पर्व
अध्याय ७२
१३ क
visibility
यत्वात्मानं
भीष्म पर्व
अध्याय ११६
५१ ख
visibility
यत्षण्ढतिलानहं
उद्योग पर्व
अध्याय १५८
३१ क
visibility
यत्स
वन पर्व
अध्याय ७३
१६ क
visibility
यत्स
विराट पर्व
अध्याय १
१५ ख
visibility
यत्स
सौप्तिक पर्व
अध्याय १
७ ख
visibility
यत्स
शान्ति पर्व
अध्याय १०३
३५ क
visibility
यत्संशोचसि
द्रोण पर्व
अध्याय ११०
२४ क
visibility
यत्सत्यं
शान्ति पर्व
अध्याय १८३
५ क
visibility
यत्सदा
आदि पर्व
अध्याय ७
१० क
visibility
यत्सनातनः
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
१६ क
visibility
यत्सनातनीं;
उद्योग पर्व
अध्याय ४४
३ क
visibility
यत्सन्दिदेशासौ
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८८
१२ क
visibility
यत्सपुत्राय़ा
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
६० क
visibility
यत्सभामध्ये
स्त्री पर्व
अध्याय १४
७ ख
visibility
यत्सभाय़ां
विराट पर्व
अध्याय ५५
४ क
visibility
यत्सभाय़ां
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
३ क
visibility
यत्सभाय़ां
शल्य पर्व
अध्याय ५८
४ ख
visibility
यत्समर्थं
वन पर्व
अध्याय १३
११६ क
visibility
यत्समर्थितम्
उद्योग पर्व
अध्याय ८६
१३ क
visibility
यत्समाचरेत्
सभा पर्व
अध्याय २०
२६ ख
visibility
यत्समाचीर्णं
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
७० क
visibility
यत्समाम्नातं
अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
३ ख
visibility
यत्समुत्सृज्य
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४६
९ ख
visibility