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अनुशासन पर्व
अध्याय ९६
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भीष्म उवाच
जग्मुः पुरस्कृत्य महानुभावं; शतक्रतुं वृत्रहणं नरेन्द्र |  ६   क
तीर्थानि सर्वाणि परिक्रमन्तो; माघ्यां यय़ुः कौशिकीं पुण्यतीर्थाम् ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति