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अनुशासन पर्व
अध्याय ९६
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भीष्म उवाच
शुक्रोऽङ्गिराश्चैव कविश्च विद्वां; स्तथागस्त्यो नारदपर्वतौ च |  ४   क
भृगुर्वसिष्ठः कश्यपो गौतमश्च; विश्वामित्रो जमदग्निश्च राजन् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति