वन पर्व  अध्याय ९४

लोमश उवाच

एवं स व्राह्मणान्राजन्भोजय़ित्वा पुनः पुनः |  १०   क
हिंसय़ामास दैतेय़ इल्वलो दुष्टचेतनः ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति