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द्रोण पर्व
अध्याय ९१
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सञ्जय़ उवाच
हाहाकारो महानासीत्तव सैन्यस्य मारिष |  ५०   क
जलसन्धं हतं दृष्ट्वा वृष्णीनामृषभेण ह ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति