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उद्योग पर्व
अध्याय ९०
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वैशम्पाय़न उवाच
अर्थधर्मातिगो मूढः संरम्भी च जनार्दन |  २   क
मानघ्नो मानकामश्च वृद्धानां शासनातिगः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति