आदि पर्व  अध्याय ९०

वैशम्पाय़न उवाच

मतिनारः खलु सरस्वत्यां द्वादशवार्षिकं सत्रमाजहार ||  २५   क
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति