आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ९

वैशम्पाय़न उवाच

मन्त्रिणश्चैव कुर्वीथा द्विजान्विद्याविशारदान् |  २०   क
विनीतांश्च कुलीनांश्च धर्मार्थकुशलानृजून् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति