आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ९

व्यास उवाच

ततः प्राय़ाद्धूमकेतुर्महात्मा; वनस्पतीन्वीरुधश्चावमृद्नन् |  १०   क
कामाद्धिमान्ते परिवर्तमानः; काष्ठातिगो मातरिश्वेव नर्दन् ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति