आदि पर्व  अध्याय ९

देवदूत उवाच

अभिधत्से ह यद्वाचा रुरो दुःखेन तन्मृषा |  ६   क
न तु मर्त्यस्य धर्मात्मन्नाय़ुरस्ति गताय़ुषः ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति