अनुशासन पर्व  अध्याय ८४

व्रह्मो उवाच

समोऽहं सर्वभूतानामधर्मं नेह रोचय़े |  ३   क
हन्यतां तारकः क्षिप्रं सुरर्षिगणवाधकः ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति