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शान्ति पर्व
अध्याय ८४
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भीष्म उवाच
स्वासु प्रकृतिषु छिद्रं लक्षय़ेरन्परस्य च |  ४५   क
मन्त्रिणो मन्त्रमूलं हि राज्ञो राष्ट्रं विवर्धते ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति