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वन पर्व
अध्याय ८२
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पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत्सुवर्णाक्षं त्रिषु लोकेषु विश्रुतम् |  १६   क
यत्र विष्णुः प्रसादार्थं रुद्रमाराधय़त्पुरा ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति