menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय ८२
chevron_left
chevron_right
पुलस्त्य उवाच
महेश्वरपदं गच्छेद्व्रह्मचारी समाहितः |  १०३   क
महेश्वरपदे स्नात्वा वाजिमेधफलं लभेत् ||  १०३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति