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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
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अर्जुन उवाच
इत्येवमुक्तः पार्थेन स राजा वभ्रुवाहनः |  २५   क
उवाच पितरं धीमानिदमस्राविलेक्षणः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति