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भीष्म पर्व
अध्याय ८१
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सञ्जय़ उवाच
भीष्मस्तु राजन्समरे महात्मा; धनुः सुचित्रं ध्वजमेव चापि |  २८   क
छित्त्वानदत्पाण्डुसुतस्य वीरो; युधिष्ठिरस्याजमीढस्य राज्ञः ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति