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भीष्म पर्व
अध्याय ८१
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सञ्जय़ उवाच
त्वय़ा न चैनां सफलां करोषि; देवव्रतं यन्न निहंसि युद्धे |  १९   क
मिथ्याप्रतिज्ञो भव मा नृवीर; रक्षस्व धर्मं च कुलं यशश्च ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति