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वन पर्व
अध्याय ८०
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पुलस्त्य उवाच
तत्राभिषेकं यः कुर्यात्पितृदेवार्चने रतः |  ४८   क
अश्वमेधं दशगुणं प्रवदन्ति मनीषिणः ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति