आदि पर्व  अध्याय ८

सूत उवाच

प्रसुप्तेवाभवच्चापि भुवि सर्पविषार्दिता |  १८   क
भूय़ो मनोहरतरा वभूव तनुमध्यमा ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति