वन पर्व  अध्याय ७८

वृहदश्व उवाच

प्रशान्ते तु पुरे हृष्टे सम्प्रवृत्ते महोत्सवे |  १   क
महत्या सेनय़ा राजा दमय़न्तीमुपानय़त् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति