शान्ति पर्व  अध्याय ७८

राजो उवाच

नाव्रह्मचारी भिक्षावान्भिक्षुर्वाव्रह्मचारिकः |  २२   क
अनृत्विजं हुतं नास्ति मामकान्तरमाविशः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति