अनुशासन पर्व  अध्याय ७४

भीष्म उवाच

गुरुशुश्रूषय़ा शूराः पितृशुश्रूषय़ापरे |  २६   क
मातृशुश्रूषय़ा शूरा भैक्ष्यशूरास्तथापरे ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति