आदि पर्व  अध्याय ७३

देवय़ान्यु उवाच

एष मे दक्षिणो राजन्पाणिस्ताम्रनखाङ्गुलिः |  २०   क
समुद्धर गृहीत्वा मां कुलीनस्त्वं हि मे मतः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति