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द्रोण पर्व
अध्याय ७२
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सञ्जय़ उवाच
ततः सर्वे रथास्तूर्णं पाञ्चाला जय़गृद्धिनः |  ३५   क
सात्वताभिसृते द्रोणे धृष्टद्युम्नममोचय़न् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति