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अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
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व्रह्मो उवाच
वेदाध्याय़ी गोषु यो भक्तिमांश्च; नित्यं दृष्ट्वा योऽभिनन्देत गाश्च |  २७   क
आ जातितो यश्च गवां नमेत; इदं फलं शक्र निवोध तस्य ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति