menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
कर्ण पर्व
अध्याय ६७
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
कर्णं तु शूरं पतितं पृथिव्यां; शराचितं शोणितदिग्धगात्रम् |  ३५   क
दृष्ट्वा शय़ानं भुवि मद्रराज; श्छिन्नध्वजेनापय़यौ रथेन ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति