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विराट पर्व
अध्याय ६७
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्मिन्वसंश्च वीभत्सुरानिनाय़ जनार्दनम् |  १५   क
आनर्तेभ्योऽपि दाशार्हानभिमन्युं च पाण्डवः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति