वन पर्व  अध्याय ६६

सुदेव उवाच

स वै द्यूते जितो भ्रात्रा हृतराज्यो महीपतिः |  ३   क
दमय़न्त्या गतः सार्धं न प्रज्ञाय़त कर्हिचित् ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति