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द्रोण पर्व
अध्याय ६५
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सञ्जय़ उवाच
मौर्वीं धनुर्ध्वजं चैव युगानीषास्तथैव च |  २३   क
रथिनां कुट्टय़ामास भल्लैः संनतपर्वभिः ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति