आदि पर्व  अध्याय ६३

वैशम्पाय़न उवाच

क्षुत्पिपासापरीताश्च श्रान्ताश्च पतिता भुवि |  २२   क
केचित्तत्र नरव्याघ्रैरभक्ष्यन्त वुभुक्षितैः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति