menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
सभा पर्व
अध्याय ६१
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यन्तरा च सर्वस्वे द्रौपदी भरतर्षभ |  ३२   क
एवं धर्मजितां कृष्णां मन्यसे न जितां कथम् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति