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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६१
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वैशम्पाय़न उवाच
धनञ्जय़ं च सम्प्रेक्ष्य धर्मराजस्य पश्यतः |  ११   क
व्यासो वाक्यमुवाचेदं हर्षय़न्निव भारत ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति