अनुशासन पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

स्वकर्मैवोपजीवन्ति नरा इह परत्र च |  ६   क
भूमिर्भूतिर्महादेवी दातारं कुरुते प्रिय़म् ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति