अनुशासन पर्व  अध्याय ६१

भीष्म उवाच

ये शूरा निहता युद्धे स्वर्याता दानगृद्धिनः |  ५४   क
सर्वे ते विवुधश्रेष्ठ नातिक्रामन्ति भूमिदम् ||  ५४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति