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अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
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भीष्म उवाच
अथ येषामधर्मज्ञो राजा भवति नास्तिकः |  ३८   क
न ते सुखं प्रवुध्यन्ते न सुखं प्रस्वपन्ति च ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति