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वन पर्व
अध्याय ६०
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वृहदश्व उवाच
मुखतः पातय़ामास शस्त्रेण निशितेन ह |  २७   क
निर्विचेष्टं भुजङ्गं तं विशस्य मृगजीवनः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति