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अनुशासन पर्व
अध्याय ६०
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भीष्म उवाच
रौद्रं कर्म क्षत्रिय़स्य सततं तात वर्तते |  ४   क
तस्य वैतानिकं कर्म दानं चैवेह पावनम् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति