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शान्ति पर्व
अध्याय ६०
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भीष्म उवाच
यश्च कश्चिद्द्विजातीनां शूद्रः शुश्रूषुराव्रजेत् |  ३४   क
कल्प्यां तस्य तु तेनाहुर्वृत्तिं धर्मविदो जनाः |  ३४   ख
देय़ः पिण्डोऽनपेताय़ भर्तव्यौ वृद्धदुर्वलौ ||  ३४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति