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विराट पर्व
अध्याय ५९
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वैशम्पाय़न उवाच
प्रध्माय़ शङ्खं गाङ्गेय़ो धार्तराष्ट्रान्प्रहर्षय़न् |  ४   क
प्रदक्षिणमुपावृत्य वीभत्सुं समवारय़त् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति