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शान्ति पर्व
अध्याय ५८
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भीष्म उवाच
यच्चास्य कार्यं वृजिनमार्जवेनैव धार्यते |  २०   क
दम्भनार्थाय़ लोकस्य धर्मिष्ठामाचरेत्क्रिय़ाम् ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति