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कर्ण पर्व
अध्याय ५७
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कर्ण उवाच
गृह्णात्यनेकानपि कङ्कपत्रा; नेकं यथा तान्क्षितिपान्प्रमथ्य |  ४०   क
ते क्रोशमात्रं निपतन्त्यमोघाः; कस्तेन योधोऽस्ति समः पृथिव्याम् ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति