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अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
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वैशम्पाय़न उवाच
क्रतुभिश्चोपवासैश्च त्रिदिवं याति भारत |  २६   क
लभते च चिरं स्थानं वलिपुष्पप्रदो नरः ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति