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शान्ति पर्व
अध्याय ५७
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भीष्म उवाच
द्वावेतौ ग्रसते भूमिः सर्पो विलशय़ानिव |  ३   क
राजानं चाविरोद्धारं व्राह्मणं चाप्रवासिनम् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति