आदि पर्व  अध्याय ५७

वैशम्पाय़न उवाच

एवं द्वैपाय़नो जज्ञे सत्यवत्यां पराशरात् |  ७१   क
द्वीपे न्यस्तः स यद्वालस्तस्माद्द्वैपाय़नोऽभवत् ||  ७१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति