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आदि पर्व
अध्याय ५७
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वैशम्पाय़न उवाच
उत्सवं कारय़िष्यन्ति सदा शक्रस्य ये नराः |  २६   क
भूमिदानादिभिर्दानैर्यथा पूता भवन्ति वै |  २६   ख
वरदानमहाय़ज्ञैस्तथा शक्रोत्सवेन ते ||  २६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति