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कर्ण पर्व
अध्याय ५५
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सञ्जय़ उवाच
स सङ्गृह्य धनुः सज्यं त्वरमाणो महारथः |  ६१   क
मुहूर्तादिव राजेन्द्र छादय़ामास साय़कैः |  ६१   ख
सौवलस्य वलं सङ्ख्ये त्यक्त्वात्मानं महावलः ||  ६१   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति