menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय ५५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
हा वीर दृष्टो नष्टश्च धनं स्वप्न इवासि मे |  १६   क
अहो ह्यनित्यं मानुष्यं जलवुद्वुदचञ्चलम् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति