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विराट पर्व
अध्याय ५५
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अर्जुन उवाच
एहि कर्ण मय़ा सार्धं प्रतिपद्यस्व सङ्गरम् |  ६   क
प्रेक्षकाः कुरवः सर्वे भवन्तु सहसैनिकाः ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति