शान्ति पर्व  अध्याय ५५

वैशम्पाय़न उवाच

अथाव्रवीन्महातेजा वाक्यं कौरवनन्दनः |  १   क
हन्त धर्मान्प्रवक्ष्यामि दृढे वाङ्मनसी मम |  १   ख
तव प्रसादाद्गोविन्द भूतात्मा ह्यसि शाश्वतः ||  १   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति