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आदि पर्व
अध्याय ५५
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वैशम्पाय़न उवाच
महर्षेः सर्वलोकेषु विश्रुतस्यास्य धीमतः |  २   क
प्रवक्ष्यामि मतं कृत्स्नं व्यासस्यामिततेजसः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति